फिनलैंड गणराज्य के राष्ट्रपति द्वारा आयोजित राजभोज के अवसर पर भारत के माननीय राष्ट्रपति का अभिभाषण
फिनलैंड के राष्ट्रपति, महामहिम श्री सौली नीनिस्तो
मैं आपके सम्मानजनक उद्गारों के लिए आभारी हूं। मध्यरात्रि के सूर्य के देश में इस विशिष्ट जन-समूह के बीच उपस्थित होना वास्तव में मेरे लिए प्रसन्नता और अत्यंत सम्मान का विषय है। मैं फिनलैंड की सरकार और उसकी मैत्रीपूर्ण जनता के लिए भारत गणराज्य की सरकार और जनता की हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं लेकर आया हूं।
महामहिम, सबसे पहले,मुझे और मेरे शिष्टमंडल के हार्दिक स्वागत और आतिथ्य सत्कार के लिए मैं आपका धन्यवाद करता हूं। हमें फिनलैंड आकर खुशी हो रही है।
महामहिम, विशिष्ट देवियो और सज्जनो,

महामहिमगण,
फिनलैंड की संसद के महामहिम अध्यक्ष श्री एरो हैनालुओमा,
मुझे, महान श्रीलंकाई बौद्ध पुनर्जागरणवादी और लेखक अंगारिका धर्मपाल के प्रति श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए स्मारक डाक टिकट जारी करने के लिए आज यहां उपस्थित होकर अत्यंत प्रसन्नता हुई है।
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1.सबसे पहले मैं, इस सम्मेलन से मुझे जोड़ने के लिए नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षा तथा उनके कार्यालय को हार्दिक धन्यवाद देना चाहूंगा। मुझे 27वें महालेखापरीक्षा सम्मेलन में उपस्थित होकर खुशी हो रही है। मैं आरंभ में ही भारत की लेखापरीक्षा संस्थान को बधाई देता हूं जिसका 150 से ज्यादा लंबा इतिहास है।
महामहिम,ल्योन्छेन सेरिंग तोबगे, भूटान के प्रधानमंत्री,
प्रख्यात हिंदी कवि डॉ. केदारनाथ सिंह को भारतीय साहित्य में असाधारण योगदान के लिए 49वां ज्ञानपीठ पुरस्कार प्रदान किए जाने के शुभ अवसर पर आज आपके बीच उपस्थित होना वास्तव में मेरे लिए प्रसन्नता की बात है। मैं इस प्रतिष्ठित पुरस्कार को जीतने के लिए उन्हें बधाई देता हूं। मुझे विश्वास है कि वह आने वाले वर्षों में हिंदी साहित्य को समृद्ध करते रहेंगे।