sampadak.aicte-india.org/qa/rbpoi/hi/press_releases/bhaarata-kai-raasatarapatai-nae-savacacha-saravaekasana-paurasakaara-paradaana-0

भारत की राष्ट्रपति ने स्वच्छ सर्वेक्षण पुरस्कार प्रदान किए

पारंपरिक जीवनशैली से सीख लेकर आधुनिक स्वच्छता प्रणालियों को सुदृढ़ किया जा सकता है: राष्ट्रपति मुर्मु

राष्ट्रपति भवन : 17.07.2025

भारत की राष्ट्रपति, श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने आज 17 जुलाई, 2025 को नई दिल्ली में आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय द्वारा आयोजित एक समारोह में स्वच्छ सर्वेक्षण पुरस्कार प्रदान किए।

इस अवसर पर राष्ट्रपति ने कहा कि स्वच्छ सर्वेक्षण हमारे शहरों द्वारा स्वच्छता की दिशा में किए जा रहे प्रयासों का आकलन करने और उन्हें प्रोत्साहित करने के लिए एक सफल प्रयोग सिद्ध हुआ है। उन्हें यह जानकर प्रसन्नता हुई कि आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय द्वारा वर्ष 2024 के लिए दुनिया का सबसे बड़ा स्वच्छता सर्वेक्षण का आयोजन किया गया, जिसमें विभिन्न हितधारकों, राज्य सरकारों, शहरी निकायों और लगभग 14 करोड़ देशवासियों  ने भागीदारी की। राष्ट्रपति ने कहा कि स्वच्छता पर बल देना, प्राचीन काल से ही हमारी सांस्कृतिक और आध्यात्मिक चेतना का आधार रहा है। अपने घरों को, उपासना स्थलों को तथा आस-पास के परिवेश को स्वच्छ रखने की परंपरा हमारी जीवन-शैली का अभिन्न अंग रही है। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी कहा करते थे, "स्वच्छता ईश्वर भक्ति के समान है।" वे स्वच्छता को धर्म, अध्यात्म और नागरिक जीवन की आधारशिला मानते थे। उन्होंने कहा कि मैंने स्वच्छता से जुड़े कार्यों से ही जन-सेवा की अपनी जीवन-यात्रा शुरू की थी।  अधिसूचित क्षेत्र परिषद की उपाध्यक्ष के रूप में, वे प्रतिदिन एक वार्ड से दूसरे वार्ड जाती थी, साफ-सफाई के  कार्यों का निरीक्षण करती थीं।

राष्ट्रपति ने कहा कि संसाधनों का कम से कम उपयोग करके और उनका उसी उद्देश्य या अन्य उद्देश्य के लिए बार-बार उपयोग करके अपव्यय को कम करना, हमेशा हमारी जीवनशैली का हिस्सा रहा है। सर्कुलर इकोनोमी के मूल सिद्धांत तथा कम मात्रा में उपयोग-पुनः उपयोग-पुनर्चक्रण (रिड्यूस-रियूज-रिसाइकल) की प्रणालियाँ हमारी प्राचीन जीवनशैली के आधुनिक और व्यापक रूप हैं। उदाहरण के लिए, जनजातीय समुदायों की पारंपरिक जीवन-शैली में सादगी होती है। वे मौसम और पर्यावरण के अनुकूल तथा सबके साथ साझेदारी करते हुए, संसाधनों का न्यूनतम उपयोग करते हैं। वे प्राकृतिक उपादानों का अपव्यय नहीं करते हैं। ऐसे व्यवहार और परंपरा को मजबूत बनाने से आधुनिक प्रणालियों को और सुदृढ़ किया जा सकता है।

राष्ट्रपति ने कहा कि अपशिष्ट प्रबंधन मूल्य श्रृंखला में पहला और महत्वपूर्ण चरण स्रोत से पृथक करना है। इस चरण पर सभी हितधारकों तथा प्रत्येक घर-परिवार को सबसे अधिक ध्यान देना है। जो बस्तियां अपशिष्ट-शून्य हैं वे अच्छे उदाहरण प्रस्तुत कर रही हैं।

राष्ट्रपति ने विद्यालय स्तरीय मूल्यांकन पहल की सराहना की, जिसकी शुरुआत विद्यार्थियों द्वारा स्वच्छता को जीवन-मूल्य के रूप में अपनाने के उद्देश्य से की गई है। उन्होंने कहा कि इस प्रयास के बहुत लाभदायक और दूरगामी परिणाम होंगे।

राष्ट्रपति ने कहा कि प्लास्टिक और इलेक्ट्रॉनिक कचरे पर नियंत्रण करना और उनसे होने वाले प्रदूषण को रोकना एक बड़ी चुनौती है। समुचित प्रयासों के बल पर हम देश के प्लास्टिक उत्सर्जन को बहुत कम कर सकते हैं। केंद्र सरकार ने वर्ष 2022 में एकल-उपयोग वाली प्लास्टिक की कुछ वस्तुओं पर प्रतिबंध लगाया है। उसी वर्ष, सरकार ने प्लास्टिक पैकेजिंग के लिए उत्पादक के उत्तरदायित्व में विस्तार करते हुए दिशानिर्देश जारी किए। उत्पादकों, ब्रांड मालिकों और आयातकों सहित सभी हितधारकों की यह ज़िम्मेदारी है कि वे इन दिशानिर्देशों का पूरी तरह से पालन करें।

राष्ट्रपति ने कहा कि स्वच्छता से जुड़े प्रयासों के आर्थिक पहलू, सांस्कृतिक आयाम होते हैं तथा भौगोलिक पक्ष भी होते हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि सभी देशवासी स्वच्छ भारत मिशन में मजबूती से भागीदारी करेंगे। उन्होंने कहा कि सुविचारित और सुदृढ़ संकल्पों के साथ सभी देशवासी वर्ष 2047 तक जिस विकसित भारत का निर्माण करेंगे वह विश्व के स्वच्छतम देशों में से एक होगा।

समाचार पत्रिका के लिए सदस्यता लें

सदस्यता का प्रकार
वह न्यूज़लेटर चुनें जिसकी आप सदस्यता लेना चाहते हैं।
सब्सक्राइबर का ईमेल पता