भारत की राष्ट्रपति अखिल भारतीय वाक् श्रवण संस्थान के हीरक जयंती समारोह में शामिल हुईं
राष्ट्रपति भवन : 01.09.2025
भारत की राष्ट्रपति, श्रीमती द्रौपदी मुर्मु आज 1 सितंबर, 2025 को अखिल भारतीय वाक् श्रवण संस्थान मैसूर, कर्नाटक के हीरक जयंती समारोह में शामिल हुईं।
इस अवसर पर राष्ट्रपति ने कहा कि अन्य समस्याओं की तरह बोलने और सुनने संबंधी समस्याओं में भी प्रारम्भिक अवस्था में लक्षणों की पहचान और उनके निदान के लिए विशेषज्ञों की आवश्यकता होती है। समाज, पीड़ितों के साथ सहयोग और सहानुभूति का नजरिया रखे इसके लिए जागरूकता भी आवश्यक है। उन्हें प्रसन्नता हुई कि अखिल भारतीय वाक् श्रवण संस्थान इन सभी क्षेत्रों में अहम भूमिका निभा रहा है।
राष्ट्रपति ने कहा कि अखिल भारतीय संस्थान के रूप में, एआईआईएसएच को निरंतर ऐसे प्रयास करने चाहिए जिससे वह देश-विदेश के संस्थानों के लिए आदर्श संस्थान बने। उन्होंने कहा कि एआईआईएसएच द्वारा स्थापित 'समावेशी थेरेपी पार्क' देश-विदेश में एक मॉडल के रूप में कार्य कर रहा है, जिसे उन बच्चों के लिए डिज़ाइन किया गया है जो वाणी और श्रवण विकारों से प्रभावित हैं।
'एआईआईएसएच आरोग्य वाणी' भी एक अनूठी पहल है जिसे वाणी और श्रवण विकारों और उनकी शीघ्र पहचान के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए डिज़ाइन किया गया है। उन्होंने कहा कि देश का एक अग्रणी संस्थान होने के नाते, एआईआईएसएच वाक् श्रवण विकारों से संबंधित राष्ट्रीय नीति-निर्माण में भी सलाह दे सकता है।
राष्ट्रपति ने कहा कि आज तकनीक हर क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। नवीनतम तकनीकों का प्रयोग वाणी और श्रवण संबंधी दिव्यांगताओं को दूर करने में अत्यंत सहायक सिद्ध होगा। लेकिन नवीनतम तकनीकों और उपकरणों को आम लोगों तक पहुँचाने के लिए, देश में इनका विकास और निर्माण आवश्यक है। उदाहरण के लिए, कॉक्लियर इम्प्लांट जैसे उपकरण कम खर्च पर उपलब्ध हों, इसके लिए आवश्यक है कि इनके निर्माण में हम आत्मनिर्भर बनें।
एआईआईएसएच जैसे संस्थानों को इस दिशा में अग्रणी भूमिका निभानी चाहिए। इस क्षेत्र में अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा देकर, एआईआईएसएच राष्ट्र निर्माण में अपना योगदान और मजबूत कर सकते हैं। यह संस्थान देश के जाने-माने शोध संस्थानों के साथ सहयोग कर सकता है। उन्होंने कहा कि एआईआईएसएच जैसे संस्थानों से यह अपेक्षा है कि वे नवाचार और करुणा की भावना के साथ काम करते हुए ऐसी तकनीकें विकसित करेंगे जिससे वाणी और श्रवण समस्याओं से पीड़ित लोग न केवल सामान्य जीवन जी सकें बल्कि समाज और अर्थव्यवस्था में अपना सर्वश्रेष्ठ योगदान दे सकें।
राष्ट्रपति ने कहा कि सरकार विभिन्न कल्याणकारी कार्यक्रमों के माध्यम से दिव्यांगजनों के लिए एक बाधामुक्त वातावरण तैयार कर रही है जिससे वे बिना किसी कठिनाई के अपने जीवन में आगे बढ़ सकें। 'सुगम्य भारत अभियान' के अंतर्गत दिव्यांगजनों को उन्नति तथा विकास के समान अवसर प्रदान करने के प्रयास हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि सभी सार्वजनिक स्थान, सुविधाएं और सूचना के स्रोत दिव्यांग-अनुकूल बनाकर, हम न केवल दिव्यांगजनों को सुविधा दे सकेंगे बल्कि दिव्यांगजनों को यह भी एहसास होगा कि समाज उनकी चिंता करता है।
एआईआईएसएच के अपने दौरे के दौरान, राष्ट्रपति ने संस्थान में उपचाराधीन दिव्यांग बच्चों और संस्थान में उपचार से स्वस्थ होने के बाद विभिन्न क्षेत्रों में सफल हुए दिव्यांगजनों से भी बातचीत की।
