आदि-कर्मयोगी अभियान के अंतर्गत प्रतिष्ठित जनजातीय लोगों के समूह ने राष्ट्रपति से मुलाकात की
राष्ट्रपति भवन : 09.09.2025
विभिन्न राज्यों से आए अलग-अलग पृष्ठभूमि के प्रतिष्ठित जनजातीय लोगों के एक समूह ने आज 9 सितंबर, 2025 को राष्ट्रपति भवन में भारत की राष्ट्रपति, श्रीमती द्रौपदी मुर्मु से मुलाकात की। यह समूह जनजातीय कार्य मंत्रालय के 'आदि कर्मयोगी अभियान' के अंतर्गत राष्ट्रपति भवन आया था। इस अभियान के अंतर्गत राष्ट्रपति भवन में अग्रणी जनजातीय लोगों की एक श्रृंखला में ऐसी बैठकें आयोजित की गई हैं। इस चरण की यह इस श्रृंखला की अंतिम बैठक थी।
समारोह को संबोधित करते हुए, राष्ट्रपति ने कहा कि आदि कर्मयोगी अभियान जनजातीय समाज और देश के भविष्य को आकार देने की दिशा में संवाद और सहयोग का एक उल्लेखनीय कार्य है। यह पहल भारत को समावेशी और समतामूलक बनाने के हमारे सामूहिक संकल्प को दर्शाती है। उन्होंने कहा कि हमें अपने प्रयासों से यह सुनिश्चित करना चाहिए कि आदिवासी समुदाय तक विकास का लाभ पहुंचे साथ ही वे राष्ट्र के भविष्य के निर्माण में सहयोगी भी बन पाएं।
राष्ट्रपति ने कहा कि आदि कर्मयोगी अभियान उत्तरदायी शासन के जरिए आदिवासी समुदायों को सशक्त बनाने की एक परिवर्तनकारी पहल है। उन्हें यह जानकर प्रसन्नता हुई कि इस वर्ष जुलाई में इस अभियान के शुभारंभ के बाद एक लाख गाँवों में, अधिकारियों, स्वयंसेवकों, स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं और आदिवासी युवाओं सहित 20 लाख आदि-कर्मयोगियों को संगठित किया गया है।
राष्ट्रपति ने कहा कि एक लाख ‘आदि सेवा केंद्रों’ को एकल खिड़की सेवा और शिकायत निवारण केंद्र बनाया गया है। धरती आबा जनजाति ग्राम उत्कर्ष अभियान से 63,000 से अधिक आदिवासी बहुल गाँवों को आवश्यक बुनियादी ढाँचा और सेवाएँ प्रदान की जा रही हैं। वन अधिकार अधिनियम को सामाजिक न्याय, समानता और पर्यावरण संरक्षण का एक महत्वपूर्ण माध्यम बनाया गया है। उन्होंने कहा कि वास्तविक सशक्तीकरण केवल योजनाओं से नहीं होता है बल्कि वास्तविक सशक्तीकरण लोगों को अधिकार देने से आता है तथा यह उन अधिकारों को सम्मान करने से अधिक मज़बूत होता है और जनजातीय समुदायों के प्रतिनिधित्व से कायम रह पाता है। उन्होंने जनजातीय समुदायों के सदस्यों से अपनी विकास यात्रा की ज़िम्मेदारी को समझने का आग्रह किया। उन्होंने उन्हें विभिन्न मंचों पर अपने विचार व्यक्त करते हुए व्यवस्थाओं को जवाबदेह बनाने की सलाह दी।
राष्ट्रपति ने कहा कि हम सबको जनजातीय भाइयों और बहनों के साथ मिलकर उनकी सक्रिय भागीदारी से अपने एक ऐसे समाज और राष्ट्र के निर्माण के लिए कार्य करना चाहिए जहाँ समानता, न्याय और सम्मान का वातावरण हो और जहाँ जनजातीय समाज की संस्कृति व परंपराओं का संरक्षण हो तथा हमारे जनजातीय भाइयों और बहनों के अधिकारों की रक्षा हो। उन्होंने जनजातीय लोगों को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए प्रौद्योगिकी के उपयोग की आवश्यकता पर बल दिया जिससे उनकी विशिष्ट पहचान और समृद्ध संस्कृति का संरक्षण हो सके।
राष्ट्रपति ने हाल ही में जनजातीय भाषाओं के लिए एआई-आधारित अनुवाद उपकरण आदि वाणी के शुभारंभ पर प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने इसे आदिवासी भाइयों और बहनों के लिए भाषा और शिक्षा के क्षेत्र में परिवर्तन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया।
सितंबर 2025 में आरम्भ किया गया ‘आदि वाणी’ का बीटा संस्करण, दुनिया का पहला एआई-संचालित स्वदेशी भाषा के अंतरण का सेतु है जिसमें भारत में जनजातीय समूहों के सांस्कृतिक संरक्षण और सामाजिक समावेशन के लिए कृत्रिम मेधा (एआई) और मशीन लर्निंग (एमएल) का उपयोग किया गया है। यह अति पिछड़े सामाजिक समूहों के कल्याण के लिए एआई के प्रयोग का एक सटीक उदाहरण है।
बैठक के दौरान, दर्शकों को आदि कर्मयोगी अभियान पर एक फिल्म दिखाई गई। केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्री श्री जुएल ओराम और जनजातीय कार्य राज्य मंत्री श्री दुर्गादास उइके भी इस बैठक में उपस्थित थे।
